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7. 1960 में, रक्षा उत्पादन महानियंत्रक के अधीन रक्षाडिफेंस कैटलॉगिंग अथारिटी गठित की गई थी, जिसे बाद में 1965 में, मानकीकरण निदेशालय के रूप में पुनर्गठित किया गया और सीधे रक्षा उत्पादन विभाग के अधीन रखा गया। 

8. आत्म-निर्भरता और आत्म-कौशल देश की रक्षा नीति के मुख्य अंग हैं, साठ के दशक के आरंभ में देशीकरण की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी थी, गुणता आश्‍वासन निदेशालय संगठन तभी से रक्षा उपकरणों और सामग्री के देशीकरण की गतिविधियों में सक्रिय रूप से लगा रहा है।
इस बढ़ते कार्य को कुशलतापूर्वक किए जाने के लिये प्रत्येक तकनीकी निदेशक के अधीन तकनीकीसमितिया गठित की गईं। ये समितियां रक्षा मंत्रालय के रक्षा आपूर्ति विभाग के पूर्ण नियंत्रण में कार्य कर रही हैं।

9. 1961 में, वाहन और इंजीनियरिंग निदेशालय को वाहन निरीक्षणनिदेशालय(रक्षा उत्पादन महानियंत्रक के अधीन) और इंजीनियरिंग निदेशालय(अनुसंधान एवं विकास संगठन के अधीन) में विभाजित किया गया था।

10. मार्च, 1963 में रक्षा उत्पादन महानियंत्रक को निरीक्षण एवं योजना महानियंत्रक (CGIP) के रूप में पुनर्पदनामित किया गया था।  

अगस्त 1963 में, निरीक्षण एवं महानियंत्रक के योजना सैल को सीधे सचिव, रक्षा उत्पादन के अधीन रखा गया था और उसे निरीक्षण महानिदेशक(DGI) के रूप में पुनर्पदनामित किया गया था।  

 

 

कॉपीराइट 2007-2010 गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय, रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार.
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