होम
  संगठन
  एफ ए क्यू
  सेवानिवृत अघिकारी
  भूमिका और कार्य
  नागरिक चार्टर
  इतिहास
 
 होम »
 

2. . इन विभिन्न निरीक्षण स्थापनाओं/इकाईयों को मिलाकर वर्तमान गुणता आश्‍वासन महानिदेशालय की स्थापना हुई। इससे पूर्व इसे निरीक्षण महानिदेशालय के नाम से जाना जाता था, जिसे संपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक नियंत्रण प्राप्त था। इन स्थापनाओं को तीन निदेशालयों में एकीकृत किया गया है, जिनमें से दो एम.जी.ओ. के अधीन तथा एक डी.जी.एस. एंड डी. के अधीन कार्य कर रही हैं। ये हैं:

    • आयुध निदेशालय, एमजीओ (आर्मी)
    • यांत्रिकी निदेशालय, एमजीओ (आर्मी)
    • निरीक्षण महानियंत्रणालय (रक्षा एवं सिविल निरीक्षण विंग को समाहित करते हुए महानिदेशकआपूर्ति एवं निपटान (डी.जी.एस.एंड डी.) के अधीन इसका गठन किया गया था ।

    3. इन्हें आयुध फैक्टरियों द्वारा निर्मित सामग्री, ट्रेड और सेनाओं को की जाने वाली सामग्री की आपूर्ति की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की संपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी।

    4. 1946 में, इन संगठनों को एक एकल निरीक्षण - सह – अनुसंधान और विकास संगठन के रूप में गठित किया गया था जिसे एम.जी.ओ. की ब्रांच में तकनीकी विकास निदेशालय (DTD) कहा जाता है।  पहली बार, एक एकल प्राधिकरण अर्थात् तकनीकी विकास निदेशालय संगठन को युद्ध सामग्री एवं उपकरणों के  निरीक्षण, परीक्षण, अनुसंधान एवं विकास का पूर्ण प्रशासनिक और तकनीकी नियंत्रण सौंपा गया था।

 

कॉपीराइट 2007-2010 गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय, रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार.
साइट का सबसे अच्छा दृश्य इंटरनेट का अन्वेषण 4.0 या नेटस्केप 4.0 और नवीनतम संस्करण, और 1024 x 768 संकल्प.